नेहा खंतवाल
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Vol. 1 (2023) · Issue 2 — May-August 2023
देश की जनसंख्या में महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा है जो पर्दे पर इनके चित्रण पर आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस लेख में महिलाओं और सिनेमा के बीच के संबंध की जांच करने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा इसमें 1947 से 2023 तक की कुछ महिला चत्रित चुनिंदा फिल्मों को मुख्य केंद्र बिंदु के रूप में प्रदर्शित किया गया है। हिंदी सिनेमा में फिल्मों का आनंद लेता हर कोई नजर आ जाता है लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि बडे पैमाने में सिनेमा ने देश के सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को आकार दिया है। सिनेमा में महिलाओं के चित्रण ने समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक माहौल पर गहरा प्रभाव डाला है। सिनेमा महिलाओं से संबंधित विभिन्न प्रसांगिक प्रश्नों को पूछता है जैसे पुरूषों के मुकाबले महिलाओं का सिनेमा में कैसा चित्रण किया जाता है, सिनेमा में महिलाओं के मुद्दे को कैसे लिया जाता है और चरित्र और महिलाओं को समाज के सामने अलग-अलग दृष्टिकोण से कैसे देखा जाता है। भारतीय सिनेमा में कई चीजें देखने को मिली है जिसमें महिलाओं को एक अबला नारी से सशक्त रूप में चित्रित किया गया है। यह लेख महिलाओं के चरित्र से लेकर महिलाओं के सांस्कृतिक और सामाजिक विकास को दर्शाता है। इसके अलावा सिनेमा में महिलाओं के योगदान को परस्पर चित्रित करता है। नेहा खंतवाल , शोध विद्यार्थी, गलगोटियास विश्वविद्यालय